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पीएफ ट्रस्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, अगली तारीख 13 अक्टूबर

नई दिल्ली। (सत् पथ )पीएफ ट्रस्ट के कर्मचारियों को उच्च पेंशन का लाभ दिए जाने से जुड़े महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई 8 सितंबर 2026 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के कोर्ट नंबर-2 में हुई। इस दौरान मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले के विरुद्ध कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को भी संबंधित रिट याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध किया गया।
सुनवाई के दौरान ईपीएफओ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री ए. एन. सुंदरम ने मामले के संभावित वित्तीय प्रभाव का उल्लेख करते हुए लगभग 1.33 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित वित्तीय भार का मुद्दा उठाया। उन्होंने तर्क दिया कि संबंधित कर्मचारियों ने पहले भविष्य निधि (पीएफ) का विकल्प स्वीकार किया था और अब पीएफ की राशि वापस कर पेंशन का लाभ प्राप्त करना चाहते हैं।
कर्मचारियों की ओर से वित्तीय तर्कों का जोरदार विरोध
कर्मचारी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुश्री मीनाक्षी अरोड़ा ने ईपीएफओ के तर्कों का जोरदार विरोध किया। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व में दिए गए आर. सी. गुप्ता तथा सुनील कुमार एवं अन्य मामलों के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि उच्च पेंशन के विकल्प से जुड़े मामलों में वित्तीय प्रभावों के प्रश्न पर न्यायालय पहले ही विचार कर चुका है।
उन्होंने एक ही संगठन के अंतर्गत आने वाले तीन पीएफ ट्रस्टों के सदस्यों के साथ कथित रूप से किए जा रहे भेदभाव का मुद्दा भी उठाया। कर्मचारी पक्ष का तर्क था कि आवश्यक राशि को ब्याज सहित वापस किए जाने पर पात्र सदस्यों को पेंशन का लाभ दिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि मामले के क्रियान्वयन में लगातार हो रही देरी से कर्मचारियों को अतिरिक्त आर्थिक नुकसान हो रहा है।
छूट प्राप्त और गैर-छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों का मुद्दा भी उठा
ईपीएफओ की ओर से यह तर्क भी रखा गया कि संबंधित याचिकाकर्ता पीएफ अधिनियम के तहत छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों से संबंधित होने के कारण एक अलग श्रेणी में आते हैं। इस तर्क का कर्मचारी पक्ष की वरिष्ठ अधिवक्ता ने विरोध करते हुए सुनील कुमार एवं अन्य के मामले में दिए गए निर्णय का हवाला दिया।
कर्मचारी पक्ष की ओर से कहा गया कि सर्वोच्च न्यायालय के उक्त निर्णय में स्पष्ट रूप से यह सिद्धांत प्रतिपादित किया गया है कि उच्च पेंशन के अधिकार के संबंध में छूट प्राप्त (Exempted) और गैर-छूट प्राप्त (Un-exempted) प्रतिष्ठानों के पात्र कर्मचारियों के बीच कोई अंतर नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा—कानून के अनुसार होगा फैसला
सुनवाई के दौरान माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि मामले के सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा और कानून के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
न्यायालय ने नई एसएलपी में नोटिस जारी करते हुए सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपनी दलीलें और आवश्यक दस्तावेज पूरे करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, इस विषय से जुड़े सभी मामलों को एक साथ संबद्ध कर दिया गया है।
सुनवाई के दौरान भारत संघ ने भी मद्रास उच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध एसएलपी दायर करने के संकेत दिए हैं।
पीएफ ट्रस्ट और उच्च पेंशन से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई अब 13 अक्टूबर 2026 को होगी। देशभर के प्रभावित कर्मचारी और पीएफ ट्रस्ट के सदस्य इस मामले के आगामी निर्णय पर नजर बनाए हुए हैं।